हिन्दू धर्म और बौद्ध धम्म में क्या अंतर है?

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हिन्दू धर्म और बौद्ध धम्म में क्या अंतर है?

परिभाषा

हिन्दू धर्म में धर्म की परिभाषा दी गई है कि धर्म वह है जिसे धारण किया जा सके। जैसे अच्छाई, बुराई, जनेऊ, भगवा, माला, अंगूठी आदि।
जबकि बौद्ध धर्म कहता है कि धर्म एक स्वभाव है। जैसे पानी का धर्म है बहना, बर्फ का धर्म है शीतलता, वायु का धर्म प्राण है, अग्नि का धर्म जलाना आदि।

बनावटी ईश्वर

2) हिन्दू धर्म मे ईश्वर की संकल्पना की गई है।
वही बौद्ध धर्म ने ईश्वर की सत्ता को नकारा है। वह कहता है कि यदि ईश्वर है तो उसे किसने बनाया? साथ ही ईश्वर को प्रमाणित भी नही किया जा सकता। यदि कोई मर रहा है या कष्ट मे है तो ईश्वर को बुलाओ, वह कँहा है।

गतिशीलता

3) हिन्दू धर्म जगत को मिथ्या मानता है।
वही बुद्ध कहते है कि जो चीज तुम्हारे सामने है वह मिथ्या कैसे हो सकती है। पहाड़ है, नदियां हैं, झरने हैं, यह सब मिथ्या कैसे?

कारण सिद्धांत

4) अब यह प्रश्न उठता है कि यह सब किसने बनाया? बुद्ध कहते है कि यह सब स्वमेव है, हो रहा है। इसके पीछे कारण सिद्धांत है।
यदि कोई भुखमरी से मर रहा है तो उसे खाना दे दो, बच जाएगा। कोई तपेदिक का रोगी, उसे औषधि दे दो बच जाएगा। यह भोजन और औषधि माया नही हकीकत है, प्रमाणित है। और यदि औषधि और भोजन ही ईश्वर है तो इसे तो मनुष्य ने अपने लाभ के लिए ईजाद किया तो ईश्वर और मनुष्य मे क्या भेद। ईश्वर की अलग सत्ता कैसे ??

अवतारकवाद का खंडन

5) हिन्दू धर्म अवतारवाद मे विश्वास करता है।
जबकि बौद्ध धर्म ने इसे भी स्वीकार नही किया।
अतः हिन्दुओ मे विभिन्न मान्यताएं हैं। कोई हनुमानजी का भक्त है तो कोई भोलेनाथ का पुजारी। एकता का अभाव है।

जीवित पुनर्जन्म

6) हिन्दू धर्म ने मरने के बाद पुनर्जन्म के सिद्धांत की व्याख्या की जो पाखण्ड पर आधारित है ।
वहीं बौद्ध धर्म ने इसे जीवत रहते हुए पुनर्जन्म की व्याख्या की है और मरने के बाद वाले पुनर्जन्म को नकारा है।

आशावादी विचार

7) हिन्दू वर्तमान पर ध्यान न देकर वर्तमान को पिछले जन्म का फल समझता है और हमेशा भविष्य की चिंता मे अपना परलोक सुधारने मे लगा रहता है। अतः हिन्दू धर्म निराशावादी है।
जबकि बौद्ध धर्म के अनुसार व्यक्ति अपने वर्तमान पर ध्यान केंद्रित कर प्रगतिशील बनता है और आशा में आगे बढ़ने के रास्ते खोजता है !

ज्ञान का भण्डार

8) हिन्दुओ ने हमेशा "माना"। जबकि बौद्धों ने हमेशा "जाना"।
फलस्वरूप जहां हिन्दू धर्म अंधविश्वास से भरा है वही बौद्धों मे तार्किकता का समावेश है।

समाधि

9) हिन्दुओ मे पूजा पद्धति प्रचलित है।
जबकि बुद्ध ने ध्यान पर बल दिया।

कर्मकांड से मुक्ति

10) इस प्रकार हिन्दुओ मे कर्मकांड और आडम्बर का बोलबाला है वही ध्यान मे कुछ पल के लिए विचारो का आवागमन रोक दिया जाता, अतः शांति मिलती है, व्यक्ति तरोताजा महसूस करता है।
सुभाष चंद मुसाफिर -हिमाचल प्रदेश

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