guru ravidas bani 1. वैखरी 2 . मध्यमा 3. पशयन्ति 4. परा संतो की चार प्रकार की बाणी होती है। परा, पश्यन्ती ,मघ्यमा और वैखरी। वैखरी बाणी जिनमें आम बातें बताई जाती है उन्हें आप चेतावनी भी कह सकते हैं ।इसमे शब्द न होकर अक्षर होते हैं।और जब शब्द ,अक्षर में बदलते है तो इन्द्रियों का प्रसार बढ़ जाता है। इसकी अवस्था जाग्रत होती है मगर ज्ञान बगैर यह बाणी और अवस्था दोनो भरम में रहती हैं। मध्यमा बानी के शब्द कंठ तक होते है अवस्था स्वपन सी होती हैं। मिथ्या स्वपन आते हैं। दुख और दुख को ज्यादा मानने व करुणा प्रज्ञा न होने से भरम स्थिति होने की वजह ज्ञान रहित बाणी है। पश्यंती बाणी में शब्द ह्रदय तक पहुचते है और इसकी अवस्था सुखोपति होती है। मनुष्य गलत, ठीक का आंकलन कर सकता है। वह शीलवान और चेतन मानव हो जाता है मगर पूर्ण मुक्त नही हो सकता। परा की बाणी शब्द ही रहतीं हैं अक्षर नही बनती तथा नाद प्रकट करती है। भरम और तृष्णा को खत्म करती है। इसमें चेतन चिंतन की अवस्था होती है जिसे तुरिया कहते हैं पर हमें आने के बाद तुरिया अवस्था में जिव से हंस हो जाता है विवेकशील ...
श्री रणधीर सिंह बेनीवाल जी श्री रणधीर सिंह बेनीवाल सेक्टर कमेटी समीक्षा मीटिंग 16 जून 2023 की सेक्टर कमेटी मीटिंग मे आपने जो जिम्मेदारी लगाई थी सम्पूर्ण प्रारूप तैयार करके सोहना विधानसभा को 24 सेक्टर मे विभाजित करके सभी सेक्टर कमेटी का निर्माण किया गया और बादशाहपुर डॉ अम्बेडकर भवन में आपको समीक्षा करवाने का काम किया ! सोहना विधानसभा मे हमने बहुजन समाज बनाकर जिसमें मुस्लिम, गुज्जर,प्रजापति,वाल्मीकि,चमार, इत्यादि मुख्य जातियों को सेक्टर कमेटी मे जगह देकर माननीय बहन जी के आदेश को लागू किया ! उसी मीटिंग मे दूसरे प्रदेश सचिव श्री धन प्रकास शेरवाल को भी आपने करनाल प्रदेश स्तरीय मीटिंग मे गुड़गाँव विधानसभा की सेक्टर कमेटी के गठन की जिम्मेदारी दी थीं श्री धन प्रकाश् प्रदेश सचिव श्री धन प्रकाश की समीक्षा उस मीटिंग मे आपके द्वारा पूछने पर श्री धन प्रकाश् अपने बनाए सेक्टर कमेटी के 3 अध्यक्षों के नाम नहीं बता पाएं थे क्योंकि उन्होंन...
I was born in the community known in India as the "Untouchables." A question is always being asked of me "How I happened to take such high degrees of education?" Another question is being asked, ' Why I am a buddhist ?" This is the question which I feel that this preface is the proper place to answer. This is the way it happened .My father was very religious person and he brought me up under a strict religious discipline. Quite early in my carrier, I found certain contradictions in my father religious way of life. He was a 'kabirpanthi'. As such he did not believe in " Moortipuja"(idol Worship). He read the books of his panth. At the same time. he compelled me and my elder brother to read every day before going to bed, a portion of the 'Ramayana and the Mahabharta' to my sisters and other persons who assembled at my father's house for hearing the 'katha'. This went for a long time number of years. I passed the fourth ...
Arnab ji Bas Ye Bata do Apke 1000 crore Rupees kaha se aaye h kiya Modi ji ne Gift kiye h apko Apki mehnat ke
जवाब देंहटाएंMubarak
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